“अटल जयंती पर ‘अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन’ का आयोजन”


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं सुप्रसिद्ध कवि भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी के जन्मदिन के अवसर पर विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस एवं न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन के सहयोग से सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता और प्रो. विनोद कुमार मिश्र, महासचिव विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के सान्निध्य में आयोजित हुए इस अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद एवं केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक (से.नि.) डॉ श्रीनारायण ‘समीर’ की गणमान्य उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुनीता पाहुजा, हिंदी और सांस्कृतिक राजदूत, भारतीय दूतावास, मॉरीशस, डॉ दीपक पाण्डेय, सहायक निदेशक, केन्द्रीय हिंदी निदेशालय, कल्पना लालजी, सृजन ऑस्ट्रेलिया संयोजक, मॉरीशस, अंजू घरभरन, मॉरीशस, डॉ सुजाता उपाध्याय, सिक्किम विश्वविद्यालय, गंगटोक, सिक्किम आदि की गणमान्य उपस्थिति रही।


कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. शैलेश शुक्ला ने कार्यक्रम का परिचय देते हुए कहा कि सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका द्वारा "अटल काव्य प्रतियोगिता" का आयोजन किया गया था, जिसमें देश- विदेश के 1168 प्रतिभागियों की 1500 से भी अधिक कविताएँ प्राप्त हुईं। इतनी कविताओं को सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका से जुड़े 18 निर्णायकों द्वारा श्रेष्ठ 21 कविताओं का चुनाव किया गया । पिछले दो महीने से चल रही इस प्रक्रिया से चुने गये श्रेष्ठ 𝟮𝟭 कवियों को आज अटल बिहारी बाजपेयी जी की जयंती पर उनकी चुनी गई रचनाओं का काव्य पाठ करने के लिए आमंत्रित किया गया है। सभी 21 कवियों ने अपनी बेहतरीन रचनाओं का काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

गूगल मीट के मध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में भारत, मॉरिशस, कतर और श्रीलंका से कुल 21 कवि-कवयित्रियों ने काव्य-पाठ किया। यह अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका के फेसबुक पेज पर लाइव किया गया और यह फ़ेसबुक के माध्यम से 10 हजार से भी ज्यादा दर्शकों-श्रोताओं तक पहुँचा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी, माननीय कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में इस शानदार कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का बधाई देते हुए कहा कि अटल जी जैसे व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि अर्पित करने का इससे बेहतर माध्यम नहीं हो सकता क्योंकि अटल जी स्वयं कवि हृदय व्यक्ति थे।

कार्यक्रम में प्रो. विनोद कुमार मिश्र, महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस ने कहा कि हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने की पहल आदरणीय अटल जी ने सत्तर के दशक में ही संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर कर दी थी। हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने का अटल जी का सपना शीघ्र साकार हो सके, इसके लिए हम सभी प्रयासरत हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. श्रीनारायण 'समीर', सुप्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद एवं निदेशक (से.नि), केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने कविता क्या है और कवि के संघर्ष और कविता के मध्यम से समाज में परिवर्तन कर सकने की क्षमता को समझाया। सभी विशिष्ट अतिथियों ने भी इस शानदार 'अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन' की सराहना की और हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने के सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका के प्रयासों को आने वाले समय में सुखद परिणाम देने में सक्षम होने की शुभकामनाएं दीं।

अटल जयंती के अवसर पर आयोजित इस 'अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन' में दोहा, कतर से शालिनी वर्मा, मॉरीशस से डी के सिंह और सुनीता आर्यनाइक, श्रीलंका से वजीरा गुणसेना, भारत से डॉ अमर कान्त कुमर, कमल किशोर राजपूत ’कमल’, मणिन्दर कुमार सिंह, डॉ अनिता सिंह, डॉ सम्राट् सुधा, नारायण सिंह निर्दोष, वंदना जैन, महादेव एस. कोलुर, फुरहत परवीन, अविनाश राव, मुनिराज हरिशंकर जोशी, राहुल आदर्श, रतन कुमारी वर्मा, अनुराधा केश्वमुर्ती, पोपट भावराव बिरारी, डॉ स्मृति आनंद आदि ने काव्य पाठ किया।

डॉ. शैलेश शुक्ला