हास्य व्यंग्य


बताओ अब इसे ढ़ाई दिन की 

बादशाहत कहा मैंने क्या
मैं कुछ गलत कह जाती।।

वर्तमान मे हो रही आज
कल की एक घटना मैं बताती
नवविवाहित जोड़े की
बात आज चुपके से सुनाती।
ढ़ाई दिन की बादशाहत
फिर कलह नजर ही आती।।

बताओ अब इसे ढ़ाई दिन की
बादशाहत कहा मैंने क्या
मैं कुछ गलत कह जाती।।

अब कहां वो पहले की तरह
किसी मे भी सहनशीलता मैं पाती।
छोटी-छोटी बातें ही विवाद
का कारण बन जाती।
सब्जी मे नमक नहीं, या समय
पे तू खाना क्यों ना बनाती।
या तो उससे भी मामूली बात
टाँविल क्यों ना रख जाती
मैं स्नान कर आया हूं अब सर्दी सताती।

बताओ अब इसे ढ़ाई दिन की
बादशाहत कहा मैंने क्या
मैं कुछ गलत कह जाती।।

पहले की औरत आते ही घर मे बच्चों की फौज थी लगाती
अब तो नवयुवा पीढ़ी कहती
दो तीन साल मज़े चाहिये
बच्चे ना जल्दी चाहती
सास कहे बेटा एक पोता लादे
उसे ही दो बाते सुनाती
सास चुपके से बैठ कहती नव
पीढ़ी खुद समझदार बतलाती।।

बताओ अब इसे ढ़ाई दिन की
बादशाहत कहा मैंने,क्या
मैं कुछ गलत कह जाती।।

आज कल सास ससुर तो
बहू बेटे के विवाद मे बीच
मे भी ना आते।
कहते लड़ झगड़ एक हो
जाएगें हमें ही बाद मे गलत बताते।।

बताओ अब इसे ढ़ाई दिन की
बादशाहत कहा मैंने क्या
मैं कुछ गलत कह जाती।।

वीना आडवानी
नागपुर, महाराष्ट्र