विश्वव्यापी चाह 2020 जैसा ना हो 2021


चंद घन्टों बाद ही साल 2020 अब बस खत्म ही होने वाला है ऐसे में आशा नेगी ने इस साल की अच्छी-बुरी यादों के बारे में बात करते हुए पूरे विश्व का जनमानस शायद यही सोच रहा होगा कि उसके जीवन में 2020 को हमेशा याद रहेगा। ये मेरी जिंदगी का वो साल है जिसने मुझे अच्छे और बुरे दोनों तरह के अनुभव दिए। प्राकृतिक आपदाओं के बीच कोरोना का भीषण प्रहार पूरे साल को लील गया। ऐसे में अब केवल एक ही चाह कि साल 2021 मेरी लिए पिछले साले से बेहतर हो।इतना तो तय है कि जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है। इसलिए जो अटल है, अपरिहार्य है उकसे विषय में तुमको शोक नही करना चाहिए। 

निश्चित तौर पर भारत ही नही बल्कि पूरे विश्व की मानवजाति के लिए 2020 भूलाए न भूलने वाला साल साबित होगा। क्या आम आदमी, क्या व्यापारी, क्या मजदूर, क्या गरीब क्या सरकार सभी के लिए वर्ष 2020 एक आफत से कम नही रहा। पहले हम भारत के संदर्भ में ही बाॅत कर ले तो लगभग पूरा साल कोरोनावायरस और उससे उपजी चुनौतियों का वर्ष रहा। 2020 के चंद महीने गुजरने के बाद ही महामारी ने देश में दस्तक दी। कोरोना को काबू करने के लिए लॉकडाउन लगाया गया, जिसने आर्थिक गतिविधियों को ठप कर दिया। प्रवासी मजदूरों को पलायन करने को मजबूर किया और लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ। 

सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर जाने वाले मजदूरों की तस्वीरें और दर्द बयां करती कहानियां हमेशा लोगों के जहन में रहेंगी। दूसरी तरफ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का रास्ता तैयार किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी। कोरोनावायरस ने देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. महामारी का कहर इस कदर बरपा कि देखते ही देखते 180 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले लिया।

 बड़ी आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर व्यवस्था ने भारत की चिंता और बढ़ाई। साल के अंतिम दौर में केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन ने सर्द मौसम में दिल्ली की सियासी तपिश बढ़ा दी है। केंद्र सरकार सितंबर महीने में 3 नए कृषि विधेयक लाई, जो संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की मुहर के बाद कानून बने। किसानों को ये कानून रास नहीं आ रहे हैं. किसान श्दिल्ली चलो अभियानश् के तहत राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में डेरा डाले हुए हैं और सरकार से लंबी लड़ाई को तैयार हैं. वे पर्याप्त राशन और जरूरत का सारा सामान लेकर आए हैं।

 कानूनों को रद्द करने से कम पर मानने को किसान तैयार नहीं हैं। किसान संगठनों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता हुई, जो बेनतीज रही. किसानों के मान-मनौव्वल का सिलसिला अब भी जारी है। साल के शुरूआत में कुछ रास्ता निकलने की उम्मीद है। 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर खासी गहमागहमी रही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमानों और एग्जिट पोल्स ने तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन की बांछे खिला दीं। लेकिन अंतिम समय में बाजी भाजपा ने मार ली। बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने न सिर्फ फिल्म जगत बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया।

 इसी के साथ वालीवुड कलाकारों के ड्रग्स कनेक्शन की हलचल से देश में हाहाकार मच गया। पिछले साल के अंत में पेश नागरिकता संशोधन विधेयक (ब्।ठ) संसद की मंजूरी के बाद कानून तो बन गया, लेकिन इसका विरोध 2020 में भी नहीं थमा। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में पूर्वोत्तर से उठी आवाज 2020 की शुरुआत तक देशभर में विरोध प्रदर्शन की शक्ल ले चुकी थी। दिल्ली के शाहीनबाग में सीएए के खिलाफ लंबे समय तक प्रदर्शन चला और हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। 

सीएए के विरोध में भड़की हिंसा फरवरी महीने के आखिर तक दंगों में तब्दील हो गई।अर्थव्यवस्था के लिहाज से साल 2020 काफी खराब रहा. अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध और अन्य वैश्विक एवं घरेलू कारकों के चलते सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था पर कोरोना महामारी की गहरी मार पड़ी. कोरोना को काबू करने के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गईं. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. हाल ही में दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के जीडीपी आंकड़े जारी हुए. अनलॉक के तहत, आर्थिक गतिविधियों के फिर से चालू होने पर अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरी है. जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में 7.5 प्रतिशत का संकुचन देखा गया. भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष (2020-21) के लिए जीडीपी में 7.5 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया है। 

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच लंबे समय से सैन्य गतिरोध चल रहा है. विवाद पैदा करने के लिए चीन ने गलवान घाटी में सैन्य तैनाती बढ़ाई, जवाब में भारत ने भी सैनिकों का जमावड़ा मजबूत कर दिया. 15-16 जून की दरमियानी रात गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए. भारत और चीन के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई, जिसमें भारत के कई जवान की जान कुर्बान हुई। चीन को भी जान-माल का खासा नुकसान हुआ। अब वैश्विक स्तर पर बाॅत करे तो कोरोना विश्व के 17 लाख से अधिक लोगों को लील चुका है। भारत की 18 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कम हुई है। नौ करोड़ लोग गरीबी की खाई में पहुंच चुके है। 

वैश्विक स्तर पर देखे तो विश्व के 160 देशों के स्कूलों में ताले पड़ने से अरबों बच्चें घरों में कैद रहे। वर्ष 2020 इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के समझौते, यूएई में निजी इस्लामी कानून में बदलाव, अजरबैजान और आर्मेनिया में जंग और ब्लैक लाइव्स मैटर का जन्म के लिए जाना जाएगा। भारत में कलाकार सुशान्त सिंह के अलावा इरफान खान, ऋषिकपूर, गायक पंडित जसराज, एसपी बालासुब्रमण्यम और राहत इन्दौरी, राजनैतिक क्षेत्र में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुर्खजी, केशुभाई पटेल, मोतीलाल बोरा,अहमद पटेल,रामविलास पासवान और अमर सिंह के साथ उद्योगपति एमडी मसाले के मालिक धर्मपाल गुलाटी, ज्योतिषी बेजान दारूवाला और पूर्व क्रिकेटर चेतन चैहान के साथ अर्जेटिना के स्टार फुटबालर डिएगो माराडोगा को खोने के लिए याद किया जाएगा। 

अब हम उम्मीद यह करनी है कि 2021 हमारे लिए अर्थ व्यवस्था को पटरी में लाने, सबसे ताकतवर देश अमरीका में ट्रप की बिदाई के बाद जो बाइडन के पर्दापण से वैश्विक बदलाव, नेपाल और पाक अस्थिरता के बीच लोकतंत्र वापसी,वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक से मुक्ति के साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता और गरीबी और असमानता के साथ बेरोजगारी विस्फोट को कम करने के साथ जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देना होगा। आने वाला 2021 पूरे विश्व के लिए मंगलकारी साबित होगा इसी की उम्मीद हमारी और आपकी होनी चाहिए।